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Saturday, July 12, 2008

माँ कैसी होती है

माँ कैसी होती है: माँ येसी होती है

शीतल मंद मंद वायु की झोको सी कोमल
सूरज की किरणों की तेजस ओजस सी मर्मं
येसी होती है माँ

झरनों की बहती कल कल फुहारों सी खिलाती
वर्षा की झरनों की बूंदों की पीडा सी रोती दुखती
माँ ऐसी होती है

अम्बर की न्यारी नीली खुली छत सी भारी
ऊँचे पर्वत की ऊँची चोटी से ऊँची
माँ ऐसी होती है

नादिया की इतराती बलखाती पानी सी चंचल
धरती चाहे कितनी हो सुखी जंजर मगर हरियाली है उनकी आचल
माँ ऐसी होती है

आशीष माँ की सदा राहे हम पर
भरी रहेगी गोद सदा हम बच्चो से
इश्वर करना कृपा मेरी माँ पर

By: Pushpa Naresh